राजस्थान सेवा नियम | RSR Rules in Hindi

संविधान के अनुच्छेद 309 के प्रावधानों के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, राजस्थान के राजप्रमुख राजस्थान के मामलों के संबंध में सेवाओं और पदों पर नियुक्त व्यक्तियों की सेवा शर्तों के संबंध में नियम बना सकते हैं।

इन नियमों को “The Rajasthan Service Rules” कहा जाता है, जो शॉर्ट भाषा में RSR रुल्स कहलाते हैं। ये 1 अप्रैल, 1951 से लागू हुए थे। किसी व्यक्ति के मामले में, जो 1-4-1951 को छुट्टी पर था, ये नियम उसकी छुट्टी से लौटने की तारीख से लागू हुआ था।

राजस्थान सेवा नियम भारत के संविधान के अनुच्छेद 309 के प्रावधान के तहत बनाये गये हैं। ये नियम 1 अप्रैल, 1951 से लागू हुए, जो 7 अप्रैल 1949 को या उसके बाद सरकार द्वारा नियुक्त सभी व्यक्तियों पर यह नियम लागू होते हैं।

इसके अलावा यह संविदाकारी राज्यों की सेवाओं के एकीकरण के परिणामस्वरूप उक्त तिथि को या उसके बाद ऐसे पदों/सेवाओं पर नियुक्त सभी व्यक्तियों और राजस्थान सरकार या किसी संविदाकारी राज्य सरकार द्वारा अनुबंध के आधार पर ऐसे पदों या सेवाओं पर नियुक्त सभी व्यक्तियों पर यह लागू होता है।

राजस्थान सेवा नियम

rsr rules in hindi

RSR रुल्स कुछ इस प्रकार से हैं-

अध्याय 1. राजस्थान सर्विस रुल्स सामान्य परिचय

Rule 1- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत प्रत्येक राज्य को अपने राज्य में सरकारी सेवा के संचालन के लिए कुछ नियम व उपबन्ध बनाने का अधिकार है। राजस्थान राज्य में इन्हीं नियमों को राजस्थान सेवा नियमों (RSR Rules) से जाना जाता है।

Rule 2- RSR के नियम राज्यपाल के कार्यकारी आदेश है तथा राजस्थान के समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर लागु होते है। निम्नांकित सेवाओं / पदों पर राजस्थान सेवा नियम लागु नहीं होते है:-

  1. राजस्थान में प्रतिनियुक्त केन्द्र सरकार/अन्य राज्य के कर्मचारी।
  2. अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारी।
  3. राजस्थान लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष व सदस्य।
  4. राजस्थान उच्च न्यायालय में नियुक्त न्यायाधीश।
  5. वह कर्मचारी जिनका विपरीत परिस्थितियों में भुगतान आकस्मिक निधि से हो। आकस्मिक निधि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 267 (2) के तहत संधारित होते है।
  6. वर्कचार्ज कर्मचारी जिनका वेतन संस्थापन मद से नहीं किया जाता हो । संचित निधि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 266 (1) के तहत संधारित होती है।

Rule 3- RSR की सभी शक्तियाँ राजस्थान के वित विभाग में निहित है।

Rule 4- राजस्थान सर्विस रुल्स में शिथिलता प्रदान करने का अधिकार राजस्थान सरकार (राज्यपाल) को है।

Rule 5- राजस्थान सर्विस रुल्स के अधीन पारित आदेशों को लोकहित में रिव्यू करने का अधिकार राजस्थान गवर्नमेंट को है।

Rule 6- राजस्थान सर्विस रुल्स की व्याख्या का अधिकार राजस्थान के राज्यपाल के पास सुरक्षित है।

अध्याय 2. परिभाषाएँ

Rule 7 (1)

आयु(Age)- किसी भी राज्य कर्मचारी की आयु पूर्ण दिवस से तात्पर्य उस दिन से है, जिस दिन से कर्मचारी अपने पद से पदोन्नत या पदावनत या सेवा निवृत होता है तथा यह दिन उसका अकार्य दिवस माना जायेगा।

राजस्थान सेवा नियमों के अनुसार किसी भी कर्मचारी की आयु से तात्पर्य व्यक्ति की उस आयु से है जो उसे राजकीय सेवा में भर्ती योग्य करती है। यदि किसी कर्मचारी की वास्तविक जन्म तिथि ज्ञात नहीं है तो जन्म तिथि GF एंड AR नियम 132 के अनुसार निम्न प्रकार से ज्ञात की जाती है-

  • यदि जन्म का केवल वर्ष ज्ञात हो तो जन्म दिनांक उस वर्ष की 1 जुलाई होगी।
  • यदि जन्म का माह और वर्ष दोनों ज्ञात हो तो जन्म दिनाक उस माह की 16 तारीख होगी।
  • यदि केवल सम्भावित आयु ज्ञात हो तो सर्वप्रथम उसकी नियुक्ति दिनांक से सम्भावित आयु निकालकर वर्ष ज्ञात करेंगे तथा पश्चात् उसकी जन्म दिनांक उस वर्ष की 1 जुलाई होगी।

Rule 7 (2)

शिक्षार्थी/प्रशिक्षु – इससे तात्पर्य RSR में उस कर्मचारी से है, जो स्थायी पद के विरूद्ध कुछ सीमा तक मासिक वेतन के आधार पर निरोपित किया जावें अथवा परीक्षण हेतु चुना जाये एंव प्रशिक्षण काल के दौरान सरकार से केवल वृतिका / स्टीपेन्ड प्राप्त करता हो।

Rule 7 (3)

संविधान- भारतीय संसद द्वारा 26/11/1949 को अंगीकृत किया गया कानून संविधान कहलाता है। संविधान से तात्पर्य भारत गण राज्य के संविधान से ही है।

Rule 7 (4)

संवर्ग- किसी राजकीय सेवा में पृथक इकाई में स्थायी पद का प्रतिनिधित्व करने वाला वर्ग संवर्ग कहलाता है। जैसे मंत्रालायकि संवर्ग, राजस्थान अधिनस्थ लेखा सेवा आदि।

  • नियम 7 (4- ए)- चतुर्थ श्रेणी सेवा आरएसआर में ग्रेड पे 1700-1800 को निरोपित करने वाला कर्मचारी ।

Rule 7 (5)

प्रतिपूरक भत्ता:-इसका मतलब है कि विशेष परिस्थितियों में आवश्यक व्यक्तिगत व्यय को पूरा करने के लिए दिया जाने वाला भत्ता जिसमें कर्तव्य का पालन किया जाता है। इसमें यात्रा भत्ता शामिल है लेकिन इसमें सत्कार भत्ता शामिल नहीं है और न ही भारत के बाहर किसी भी स्थान से समुद्र के रास्ते मुफ्त यात्रा का अनुदान शामिल है।

Rule 7 (6)

सक्षम अधिकारी- परिशिष्ट 9 भाग 2 के तहत आने वाले सभी कर्मचारी, जो वित्तीय शक्तियों का उपयोग कर सकते हैं। किसी भी शक्ति के प्रयोग के संबंध में, इसका अर्थ राज्यपाल या कोई प्राधिकारी है जिसे इन नियमों के तहत या इसके तहत शक्ति सौंपी गई है।

Rule 7 (7)

संचित निधि- भारतीय संविधान के अनु. 266 (1) के तहत निर्धारित निधि है। संचित निधि में समस्त आयगत और पूंजीगत प्राप्तियां तथा समस्त आयगत और पूंजीगत भुगतान आते है।

  • नियम 7(7- ए), रूपान्तरित अवकाश– रूपान्तरित अवकाश से तात्पर्य राजस्थान सेवा नियम-1 के नियम 93 (2) के तहत लिए गए अवकाश से है। अर्द्धवेतन अवकाशों को रूपान्तरित अवकाश में परिवर्तित किया जा सकता है। दो अर्द्धवेतन अवकाश को एक रूपान्तरित अवकाश में परिवर्तित किया जा सकता है।

Rule 7 (8) (ब-I)

राज्य सरकार किसी आदेश द्वारा निम्नलिखित परिस्थितियों में किसी राज्यकर्मचारी को कर्तव्य पर माने जाने की घोषणा कर सकती है।

  • भारत में किसी प्रषिक्षिण की अवधि के दौरान।
  • केन्द्रीय आपातकालीन सहायता प्रषिक्षण संस्थान नागपुर या राष्ट्रीय अग्निषामन सेवा महाविधालय नागपुर में नागरिक सुरक्षा से सम्बन्धित पाठ्यक्रम।
  • राजस्थान सेवा नियमों के खण्ड 2 के परिषिष्ट IX मे मद। के अनुसार निम्नांकित शर्तें पूर्ण होने पर ही भारत में किसी पाठ्यक्रम की अवधि को कर्तव्य अवधि में माना जायेगा यदि-
    • सरकार को ऐसे प्रषिक्षण के लिए कर्मचारी को भेजना अनिवार्य हो ।
    • प्रशिक्षण व्यावसायिक एवं तकनीकी विषयों में ना हो।
    • प्रशिक्षण अवधि एक वर्ष से अधिक ना हो।

Rule 7 (8) (ब-II)

छात्र वजीफा या अन्यथा के मामले में- जो भारत में किसी विश्वविद्यालय, कॉलेज या स्कूल में प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरा करने पर, पाठ्यक्रम के संतोषजनक समापन और कर्तव्यों के ग्रहण के बीच के अंतराल के दौरान सरकार की सेवा में नियुक्त होने का हकदार है।

Rule 7 (8) (ब-III)

APO अर्थात आदेशों की प्रतीक्षा में व्यतीत अवधि कर्तव्य अवधि में मानी जाती है।

Rule 7 (8) (ब-IV)

सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से किसी ऐसे विभागीय परीक्षा में उपस्थित होता है, जिसके उतिर्ण होने से कार्यकुशलता में वृद्धि हो, तो ऐसे अवधि कर्तव्य की अवधि है।

Rule 7 (8) (ब-V)

सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से ऐच्छिक परीक्षा में उपस्थित होता है, तो परीक्षा अवधि तथा परीक्षा स्थल तक आवागमन का समय कर्तव्य अवधि में माना जायेगा।

नोट- व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित अधिकारी या भारत के प्रतिष्ठित संस्थानों में आयोजित सेमिनार में भाग लेने वाले अधिकारियों को राजस्थान सेवा नियम 7(8) के अन्तर्गत कर्तव्य पर माना जायेगा यदि-

  • एक बार में मुख्यालय से बाहर व्यतीत समय 7 दिवस से अधिक ना हों।
  • यात्रा भत्ता एवं मंहगाई भत्ता संबन्धित संस्थान से देय होगा। राज्य सरकार किसी भी तरह के भत्ते का वहन नहीं करेगी।

Rule 7 (9)

फीस- संचित निधि के अलावा अन्य निधि से प्राप्त होने वाली आय फीस कहलाती है। नियम 64 के तहत प्राप्त भुगतान शुल्क है।

Rule 7 (10)

  • 7(10)- वैदेशिक सेवा- ऐसी सेवा जिसमें कर्मचारी को भुगतान संचित निधि के स्थान पर स्थानीय निधि से प्राप्त होता है, वैदेशिक सेवा कहलाती है।
  • 7(10)(ए)- राजपत्रित अधिकारीः- वर्गीकरण नियंत्रण अपील नियम 1958 की धारा 1 में आने वाले समस्त अधिकारी राजपत्रित अधिकारी होते है।
  • 7(10)(ब)अर्द्ध-वेतन- अर्द्ध-वेतन से तात्पर्य नियम 93 के तहत दिये जाने वाले अवकाश से है।

Rule 7 (11)

विभागाध्यक्ष- परिशिष्ट 14 भाग 2 के तहत आने वाले समस्त अधिकारी विभागाध्यक्ष होते है।

Rule 7 (12)

सार्वजनिक अवकाश- ऐसे अवकाश जो सरकार देती है अर्थात ऐसे अवकाश जो सरकार द्वारा किसी अधिसूचना के आधार पर घोषित होता है।

Rule 7 (13)

मानदेय- मानदेय सदैव सरकारी कर्म चारी को कोई सामयिक कार्य करने पर देय होता है।

Rule 7 (14)

पदभार ग्रहण काल- 1981 नियमों के तहत कर्मचारी का एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानान्तरण होने पर दिया जाने वाला समय पदभार ग्रहणकाल कहलाता है।

Rule 7 (15)

अवकाश- कर्मचारी द्वारा अपने खाते से लिए गए अवकाश।

Rule 7 (16)

अवकाश वेतन- कर्मचारियों द्वारा जिस प्रवृत्ति का अवकाश लिया जाता है, उसी के अनुसार उसे वेतन देय है। (नियम 97)

Rule 7 (17)

पदाधिकार- स्थायी पद पर स्थायी रूप से नियुक्त होने पर कर्मचारी का उस पद पर पदाधिकार होता है।

Rule 7 (18)

स्थानीय निधि:- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 268(2) के अंतर्गत निर्धारित की जाने वाली निधि को स्थानीय निधि कहा जाता है।

Rule 7 (19)

मंत्रालयिक कर्मचारी:- Appendix 12 के अंतर्गत आने वाले कर्मचारी मंत्रालयिक कर्मचारी हैं।

Rule 7 (20)

माह– माह का अर्थ कैलेंडर वर्ष की एक इकाई से है।

Rule 7 (21)

दिनांक 01.01.1995 को विलोपित।

Rule 7 (22)

स्थायी कर्मचारी- इसका अर्थ है आरएसआर में स्थायी पद धारण करने वाला कर्मचारी।

Rule 7 (23)

स्थानापन्न- इसका तात्पर्य उन कर्मचारियों से है जिन्हें उनके पद के साथ-साथ अतिरिक्त पद की भी जिम्मेदारी दी जाती है।

Rule 7 (24)

वेतन- वेतन का तात्पर्य आरएसआर में एक सरकारी कर्मचारी द्वारा प्राप्त मासिक राशि से है।

Rule 7 (25)

पेंशन- सेवानिवृत्ति के बाद सरकार द्वारा कर्मचारियों को भुगतान की जाने वाली मासिक राशि।

Rule 7 (26)

स्थायी पद- ऐसे पद जिनके लिए आरएसआर में कोई समय सीमा निर्धारित नहीं है।

Rule 7 (27)

व्यक्तिगत वेतन- यदि किसी सरकारी कर्मचारी की वेतन श्रृंखला में किसी भी कारण से कटौती हो जाती है और उस कटौती का लाभ एक निश्चित समय सीमा के भीतर दोबारा दिया जाता है, तो इसे व्यक्तिगत वेतन कहा जाता है।

Rule 7 (28)

अर्जित अवकाश- सेवा में बिताए गए समय के आधार पर अर्जित अवकाश अर्जित अवकाश की श्रेणी में आता है। (नियम 91 के अंतर्गत)

Rule 7 (29)

पद का अनुमानित वेतन- ऐसा वेतन हमेशा उसी स्थिति में देय होता है, जब कर्मचारी को उसके पद के अलावा किसी अतिरिक्त पद का अधिकार सौंपा गया हो। ऐसा वेतन देने या न देने का अधिकार सदैव वित्त विभाग की अनुशंसा के आधार पर होता है।

Rule 7 (30)

परिवीक्षाधीन- 20.01.2006 के बाद राजस्थान सरकार द्वारा ऐसे किसी पद पर नियुक्ति नहीं की जाती है। ऐसे कर्मचारी को निश्चित वेतन देय होता है।

  • नियम 7(30)(ए)- परिवीक्षाधीन प्रशिक्षु- 20.01.2006 के बाद स्थायी पद पर नियुक्ति दो वर्ष के लिए अस्थायी तौर पर की जाती है।

Rule 7 (31)

विशेष वेतन- यदि कोई सरकारी कर्मचारी सेवा में रहते हुए कोई विशेष उपलब्धि हासिल करता है तो उसे वित्त विभाग की सलाह पर विशेष वेतन दिया जाता है।

Rule 7 (32)

उच्च सेवा- आरएसआर में चतुर्थ श्रेणी सेवा को छोड़कर सभी सेवा उच्च सेवा है।

Rule 7 (33)

जीवन निर्वाह अनुदान- कर्मचारी को निलंबित किये जाने के बाद सरकार द्वारा कर्मचारी को देय मासिक अनुदान को जीवन निर्वाह अनुदान कहा जाता है।

Rule 7 (34)

मूल वेतन- कर्मचारी की वेतन श्रृंखला में ग्रेड पे जुड़ने के बाद उसका मूल वेतन निर्धारित किया जाता है।

Rule 7 (35)

स्थायी नियुक्ति- ऐसी नियुक्ति जिस पर कार्य करने वाले कर्मचारी का एक निश्चित कार्यकाल होता है।

Rule 7 (36)

निश्चित पद- आमतौर पर ऐसे पद एक निश्चित अवधि के लिए बनाए जाते हैं और उन पर काम करने वाले कर्मचारी का कार्यकाल उस पद से जुड़ा रहता है।

Rule 7 (37)

समयमान- किसी कर्मचारी का समयमान वेतन हमेशा निचले स्तर से उच्च स्तर की ओर बढ़ता है।

Rule 7 (38)

स्थानांतरण- इसका अर्थ है किसी कर्मचारी की एक स्थान से दूसरे स्थान पर नियुक्ति।

Rule 7 (39)

अवकाश विभाग- ऐसे विभाग जिनका मुख्यालय एक निश्चित समय सीमा तक बंद रहता है। जैसे न्यायिक विभाग, शिक्षा विभाग, कृषि विभाग।

Rule 7 (40)

पेंशन के लिए अयोग्य संस्थाएं- ऐसे कर्मचारियों का वेतन और भत्ते सरकारी बजट के अलावा सरकार के किसी अन्य स्रोत से निर्धारित होते हैं।

अध्याय 3. सर्विस की सामान्य शर्तें

Rule 8

20.1.2006 को या उसके बाद की सभी नियुक्तियाँ 2 वर्ष की अवधि के लिए परिवीक्षाधीन प्रशिक्षु के रूप में की जाएंगी। उसे निर्धारित पारिश्रमिक का भुगतान किया जाएगा। जैसे चिकित्सा अधिकारी- एक वर्ष।

परिवीक्षाधीन प्रशिक्षण के सफल समापन के बाद, वेतनमान में न्यूनतम वेतन की अनुमति दी जाएगी। परिवीक्षाधीन प्रशिक्षण की अवधि को वार्षिक वेतन वृद्धि प्रदान करने के लिए नहीं गिना जाएगा।

प्रोबेशनर प्रशिक्षणार्थी- स्थाई पद पर दो वर्ष के लिए अस्थाई नियुक्ति। 13 मार्च 2006 की अधिसूचना के आधार पर ये नियम 20 जनवरी 2006 से प्रभावी हुआ। इसमें कर्मचारियों को 02 वर्ष के लिए एक स्थिर पारिश्रमिक मिलता है तथा उनके स्थिर मानदेय पर कोई कटौती नहीं होती। इन्हें किसी प्रकार का अवकाश देय नहीं होता। (नियम 103 की सीरिज को छोड़कर)

नियम 8 (अ)

प्रथम नियुक्ति के समय आयु ( 16 से 35 वर्ष)- महिला को दिनांक 24.02.2007 से अधिकतम आयु में 10 वर्ष की छूट तथा ओ. बी. सी. को 03 वर्ष की छूट दी जायेगी। आरक्षित वर्ग की अधिकतम आयु किसी भी परिस्थिति में 35 वर्ष के बाद नहीं की जावेगी।

दिनांक 25.11.1996 से अनु. जाति / अनु. जनजाति को अधिकतम आयु में 05 वर्ष अधिकतम आयु 45 वर्ष कर दी गई है। दिनांक 06.03.2012 के बाद राजस्थान राज्य एवं अधीनस्थ सेवा में सामान्य तौर पर नई नियुक्ति की आयु 16-35 वर्ष मानी है, प्रतिभुति से जुड़े मामलों में 18-35 वर्ष मानी गई है। दिनांक 24.05.2004 के बाद महिलाओं हेतु अधिकतम आयु 42 वर्ष मानी गई।

नियम 8 (ब)

नाम परिवर्तन- इस नियम के तहत एक निर्धारित प्रपत्र में सूचनायें एकत्रित करके कर्मचारी द्वारा कार्यालय अध्यक्ष को दी जायेगी तथा कार्यालयाध्यक्ष इन्हें एजी कार्यालय प्रेषित करेगा। तत्पश्चात् एजी के द्वारा सत्यापन की सम्पूर्ण जानकारी राजस्थान के राजपत्र में प्रकाशित होने के बाद कर्मचारी का नाम परिवर्तन हो जायेगा। प्रथम नियुक्ति के समय वेतन बिल की जांच कोषाधिकारी करते है।

Rule 9

नई नियुक्ति पर मेडिकल सर्टिफिकेट- इस नियम के तहत किसी भी सेवा में कर्मचारी की नई नियुक्ति पर उसे मेडिकल कारणों से फिट होने का सर्टिफिकेट देना होगा।

Rule 10

मेडिकल सर्टिफिकेट का प्रारूप- इस नियम के तहत सरकार द्वारा मेडिकल सर्टिफिकेट का प्रारूप तैयार किया गया है।

Rule 11

मेडिकल सर्टिफिकेट पर हस्ताक्षर एवं प्रतिहस्ताक्षर:- मेडिकल सर्टिफिकेट पर हस्ताक्षर जिला स्तर पर सरकारी अस्पताल के पीएमओ द्वारा किया जाता है। सरकारी अस्पताल के विभागाध्यक्ष को भी कुछ हद तक मेडिकल सर्टिफिकेट जारी करने की छूट है।

Rule 12

मेडिकल सर्टिफिकेट से किसे छूट है-

  • वे सभी रंगरूट जो पहले ही फिजिकल टेस्ट पास कर चुके हैं।
  • कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति की तिथि के तुरंत बाद पुनः नियुक्त किए जाने पर।
  • चतुर्थ से ऊपर के अस्थायी कर्मचारियों को उच्च सेवा तक 03 माह तक की छूट।
  • महिला कर्मचारियों की मेडिकल जांच के समय मेडिकल बोर्ड में एक महिला डॉक्टर का होना अनिवार्य।

Rule 13

सेवा की मूल शर्ते- इस नियम के तहत प्रत्येक सरकारी कर्मचारी को 24 घंटे अपना समय सरकार को देना होगा तथा वह दैनिक कर्तव्य से अधिक किये गये कर्तव्य के बदले भुगतान हेतु कोई दावा प्रस्तुत नहीं कर सकता है।

Rule 14

एक पद एक व्यक्ति का सिद्धांत- इस नियम के तहत एक समय में एक स्थायी पद पर केवल एक ही व्यक्ति कार्य करेगा। एक समय में दो या दो से अधिक व्यक्ति अस्थायी पदों पर कार्य कर सकते हैं।

Rule 15

कार्यकाल– स्थायी पद पर स्थायी नियुक्ति।

Rule 16

कब तक रहेगा पद-

  • छुट्टी के दौरान
  • निलंबित अवस्था के दौरान
  • विदेश सेवा की स्थिति में कर्मचारी 03 वर्ष तक अपने पद पर बना रहता है।

Rule 17

पद से निलम्बन- यदि कर्मचारी के विरूद्ध सीसीए नियम 1958 के तहत कार्यवाही की जाती है तो कर्मचारी को पद से निलम्बित किया जा सकता है।

Rule 18

पद से बर्खास्त करना- यदि कर्मचारी के विरूद्ध सीसीए नियम 1958 के तहत कार्यवाही की गयी है और वह दोषी पाया जाता है तो उसका पद समाप्त कर दिया जायेगा। 20.08.2001 के बाद यदि कर्मचारी लगातार 05 वर्ष तक अवकाश पर है तो उसे पद से बर्खास्त कर दिया जायेगा।

Rule 19

कार्यालय का स्थानांतरण:

  • सरकार जनहित को ध्यान में रखते हुए।
  • दिनांक 02.08.2005 के बाद शासन द्वारा किया गया स्थानांतरण जनहित में होना चाहिए।
  • यदि सरकार कर्मचारी पर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई करती है तो पद स्थानांतरण करें।

Rule 20

राज्य कर्मचारी का स्थानांतरण- नियम 19 के समान

Rule 21

जीवन बीमा या भविष्य निधि की सदस्यता:

  • नियम 21(A)- आरपीएमएफ (राज. पेंशनर्स मेडिकल फंड) 01.01.1981 से शुरू हुआ और 01.01.2004 को बंद हुआ।
  • नियम 21(B)- प्रत्येक सरकारी कर्मचारी के लिए जीपीएफ की सदस्यता अनिवार्य है। 01.01.2004 के बाद नियुक्त कर्मचारियों पर लागू नहीं।
  • नियम 21(C)- राज्य कर्मचारियों के सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) से प्रत्येक कटौती जीपीएफ में होगी।

Rule 22

प्रशिक्षण अवधि के दौरान दिये गये भुगतान को पुनः जमा करना- इस नियम के तहत परिशिष्ट 18 (A) के तहत बांड भरा जायेगा। यदि बांड के अनुसार सेवा नहीं की गई तो मूल राशि कर्मचारी से वसूल की जाएगी।

नियम 22 (B)

बांड में सेवा की अवधि:- इस नियम के तहत बांड परिशिष्ट 18 (B) के तहत भरा जाएगा। बांड शर्ते:-

  • यदि प्रशिक्षण 03 से 06 माह का है तो – 01 वर्ष
  • यदि प्रशिक्षण 06 माह से 01 वर्ष तक है तो – 02 वर्ष
  • 31.05.2012 के बाद:- यदि प्रशिक्षण 01 से 02 वर्ष है तो 03 वर्ष

Rule 23

स्थिति जब कर्मचारी सरकारी रोजगार से बाहर हो जायेगा- यदि कर्मचारी के विरूद्ध सीसीए नियम 1958 के तहत कार्यवाही की गई है। यदि कर्मचारी 20.08.2001 के बाद 05 वर्ष की लगातार सेवा से अनुपस्थित है।

  • नियम 23(A)- अस्थायी कर्मचारियों की सेवा समाप्ति से पहले नरेट्स- यदि कर्मचारी 03 वर्ष से अधिक समय के लिए अस्थायी पद पर नियुक्त है तो उसे 03 माह पूर्व सूचना दी जायेगी। यदि कर्मचारी ने 03 वर्ष से कम सेवा की है तो 01 माह पूर्व सूचना दी जायेगी।
  • नियम 23(B)- कनिष्ठता के आधार पर अस्थायी पदों में कटौती- इस नियम के तहत जो कर्मचारी पहले नियुक्त होते हैं वे सेवा से चले जाते हैं और जो बाद में नियुक्त होते हैं वे पहले चले जाते हैं।

अध्याय 4. वेतन

Rule 24

वेतन पद के वेतन से अधिक नहीं होना चाहिए- सरकारी सेवा में समय वेतनमान पर किसी पद पर नियुक्त व्यक्ति प्रारंभिक वेतन के रूप में वेतनमान का न्यूनतम वेतन प्राप्त करेगा। या ऐसे स्तर पर जो सरकार द्वारा निर्धारित या अनुमोदित किया जा ता है, बशर्ते कि यह उसके द्वारा धारित पद के लिए सक्षम प्राधिकारी द्वारा स्वीकृत वेतन से अधिक न हो।

सरकार की मंजूरी के बिना किसी सरकारी कर्मचारी को कोई विशेष या व्यक्तिगत वेतन नहीं दिया जाएगा।

Rule 25

प्रशिक्षण आदि के दौरान भुगतान- नियम 7(8)(बी) के तहत कर्तव्य के रूप में मानी जाने वाली किसी भी अवधि के संबंध में, एक सरकारी कर्मचारी को ऐसा वेतन दिया जा सकता है जिसे सरकार न्यायसंगत समझे।

लेकिन किसी भी मामले में उस वेतन से अधिक नहीं जो सरकारी कर्मचारी नियम 7 (8) (बी) के तहत ड्यूटी के अलावा अन्य ड्यूटी पर होने पर प्राप्त करता है।

Rule 26

एक सरकारी सेवक जो पहले से ही एक सेवा, संवर्ग या विभाग में कार्यरत है, जो किसी अन्य सेवा, संवर्ग या विभाग में सीधी भर्ती या विशेष चयन (प्रतिनियुक्ति के अलावा अन्य संवर्ग या विभाग में स्थानांतरण सहित) द्वारा नियुक्त किया गया है, न कि सेवा के अनुसार पदोन्नति द्वारा।

तब नियमों के अनुसार उसका प्रारंभिक वेतन निम्नानुसार तय किया जाएगा-

श्रेणी (ए) के व्यक्तियों को नीचे बताए गए तरीके के अनुसार वेतन निर्धारित किया जाएगा-

  • यदि नए पद का अधिकतम वेतनमान पुराने पद के अधिकतम से अधिक है, तो वेतन पुराने पद के अंतिम मूल वेतन के ऊपर नए पद के समयमान के स्तर पर तय किया जाएगा।
  • यदि नए पद के वेतनमान की अधिकतम सीमा पुराने पद के अधिकतम वेतनमान के बराबर है, तो वेतन नए पद के समयमान के स्तर पर तय किया जाएगा जो पुराने पर उसके अंतिम मूल वेतन के बराबर है। पद, या यदि ऐसा कोई चरण नहीं है, तो उसके नीचे का चरण वेतन और व्यक्तिगत वेतन के बराबर अंतर होगा।
  • यदि नए पद का अधिकतम वेतनमान पुराने पद के अधिकतम से कम है, तो वेतन उस स्तर पर तय किया जाएगा जिसके लिए वह हकदार होता, जैसे कि पुराने पद पर की गई सेवा की अवधि। इस शर्त के अधीन कि निर्धारित वेतन पुराने पद पर अंतिम आहरित वेतन तक सीमित होगा, नए पद के समक्ष प्रस्तुत किए गए अनुसार गिना जाएगा।

Rule 27

इस नियम में किसी समय वेतनमान पर किसी पद पर मौलिक नियुक्ति पर प्रारंभिक वेतन का पुनर्क्रमण, जिसे कम कर दिया गया है के बारे में बताया गया है।

पद से जुड़े कर्तव्यों या जिम्मेदारियों में कमी के अलावा अन्य कारण और जो कटौती से पहले समयमान पर वेतन पाने का हकदार नहीं है, उसे नियम 26 द्वारा विनियमित किया जाता है, दोनों ही मामलों में इसके खंड (ए) द्वारा कवर किया गया है।

Rule 28

किसी पद के वेतन में परिवर्तन होने पर वेतन का विनियमन- जिस पद के धारक का वेतन बदला गया है, उसे ऐसा माना जाएगा मानो उसे नए पद पर नए वेतन पर स्थानांतरित कर दिया गया हो, बशर्ते कि वह अपने विकल्प पर पद पर बना रह सके।

उसका पुराना वेतन उस तारीख तक, जब तक कि उसने पुराने वेतनमान पर अपनी अगली या कोई अनुवर्ती वेतन वृद्धि अर्जित नहीं कर ली हो, या जब तक वह अपना पद खाली नहीं कर देता या उस समय-मान पर वेतन लेना बंद नहीं कर देता। एक बार प्रयोग किया गया विकल्प अंतिम है।

Rule 29

एक वेतन वृद्धि सामान्यतः स्वाभाविक रूप से ली जाएगी जब तक कि इसे वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील नियमों के प्रासंगिक प्रावधानों के अनुसार ऐसी वेतन वृद्धि को रोकने के लिए सशक्त प्राधिकारी द्वारा रोक न दिया जाए।

वेतन वृद्धि रोकने वाले किसी भी आदेश में उस अवधि का उल्लेख होगा जिसके लिए इसे रोका गया है और क्या स्थगन का प्रभाव भविष्य की वेतन वृद्धि को स्थगित करने पर पड़ेगा।

Rule 33

निचले ग्रेड या पद पर स्थानांतरण का वेतन- जो प्राधिकारी किसी सरकारी कर्मचारी को दंड के रूप में उच्च से निम्न ग्रेड या पद पर स्थानांतरित करने का आदेश देता है, वह उसे निचले ग्रेड या पद की अधिकतम सीमा से अधिक वेतन लेने की अनुमति दे सकता है, जो वह उचित समझे।

Rule 34

निचले ग्रेड या पद पर कटौती पर भविष्य में वेतन वृद्धि।

  • यदि किसी सरकारी कर्मचारी को दंड के रूप में उसके समय-मान में निचले स्तर पर कम कर दिया जाता है, तो ऐसी कटौती का आदेश देने वाला प्राधिकारी उस अवधि को बताएगा जिसके लिए यह प्रभावी होगा और क्या बहाली पर भविष्य में वेतन वृद्धि स्थगित करें और यदि हां, तो किस हद तक।
  • यदि किसी सरकारी कर्मचारी का वेतन दंड के रूप में कम किया जाता है, तो कटौती का आदेश देने वाला प्राधिकारी उस अवधि को निर्दिष्ट करता है या नहीं करता है जिसके लिए कटौती प्रभावी होगी; लेकिन जहां अवधि निर्दिष्ट है, वह प्राधिकारी यह भी बताएगा कि क्या बहाली पर, कटौती की अवधि भविष्य की वेतन वृद्धि को स्थगित करने के लिए लागू होगी और यदि हां, तो किस हद तक।

Rule 35

इस नियम में स्थानापन्न सरकारी सेवकों का वेतन निर्धारित किया गया है।

स्थानापन्न नियुक्ति- अध्याय 6 के प्रावधानों के अधीन, एक सरकारी कर्मचारी जिसे पद पर स्थानापन्न करने के लिए नियुक्त किया गया है, वह कार्यकाल वाले पद के अलावा किसी स्थायी पद के संबंध में अपने मूल वेतन से अधिक वेतन नहीं लेगा, जब तक कि स्थानापन्न नियुक्ति में यह धारणा शामिल न हो।

पद से जुड़े कर्तव्यों और जिम्मेदारियों की तुलना में अधिक महत्व के कर्तव्य और जिम्मेदारियां अहम है। एक कार्यकाल पद के अलावा जिस पर वह ग्रहणाधिकार रखता है या ग्रहणाधिकार रखता होगा यदि उसका ग्रहणाधिकार निलंबित नहीं किया गया है।

अध्याय 5. वेतन में वृद्धि

Rule 42

सरकार सरकारी कर्मचारियों को ऐसे भत्ते दे सकती है और उनकी राशि और शर्तों को निर्धारित करने वाले नियम बना सकती है।

Rule 43

नियम 43 (अ)

सरकार किसी निजी व्यक्ति या निकाय या सार्वजनिक निकाय के लिए निर्दिष्ट सेवाएं करने के लिए काम करने और शुल्क स्वीकार करने की अनुमति दे सकती है, यदि यह उसके आधिकारिक कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को नुकसान पहुंचाए बिना किया जाता है।

नियम 43: (ब)

शुल्क की स्वीकृति के लिए सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी आवश्यक है।

नियम 43: (स)

परिस्थितियाँ जिनमें मानदेय दिया जा सकता है-

  • सिवाय इसके कि जब विशेष कारण मौजूद हों जिन्हें इससे हटने के लिए लिखित रूप में दर्ज किया जाना चाहिए।
  • अनुदान की मंजूरी या मानदेय की स्वीकृति तब तक नहीं दी जानी चाहिए जब तक कि कार्य सरकार की पूर्व सहमति से नहीं किया गया हो और उसकी राशि का अग्रिम भुगतान नहीं किया गया हो।

मानदेय प्रदान करने हेतु दिशा-निर्देश:

  • काम में अस्थायी वृद्धि के लिए कोई मानदेय स्वीकार्य नहीं है जो काम की सामान्य घटना है और सरकारी कर्मचारी के वैध कर्तव्यों का हिस्सा है।
  • अपने कर्तव्यों के अतिरिक्त किसी अन्य स्वीकृत पद के कर्तव्यों का पालन करने के लिए कोई मानदेय नहीं।

निम्नलिखित मामलों में मानदेय स्वीकृत किया जा सकता है:

  • केवल एचओडी और एडी कार्यालयों में विधानसभा सत्र के दौरान विधानसभा प्रश्नों से निपटने के लिए।
  • केवल एफडी में बजट तैयार करने के लिए।
  • विभागाध्यक्ष द्वारा शासन स्तर/राज्य स्तर पर आयोजित सम्मेलन कार्य में भाग लेने हेतु।
  • राज्य स्तर या जिला स्तर पर गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस के कार्य में भाग लेने के लिए।
  • मार्च के दूसरे पखवाड़े में ट्रेजरी को बिल जमा करने के लिए निर्धारित किया जाएगा।
  • ट्रेजरी स्टाफ/एओ के कार्यालय द्वारा फिक्सेशन कार्य (छह महीने के भीतर)
  • ट्रेजरी स्टाफ/एओ के कार्यालय द्वारा फिक्सेशन कार्य (छह महीने के भीतर)।
  • एफडी द्वारा सार्वजनिक ऋण जारी करना (8 महीने के भीतर)।
  • अचानक प्राकृतिक आपदाएँ।
  • राष्ट्रपति या प्रधान मंत्री की यात्रा
  • सरकारी बकाया की वसूली के लिए अभियान (2 महीने के लिए)

नियम 43: (द)

अनुदान के कारणों को लिखित रूप में दर्ज किया जाना चाहिए (शुल्क और मानदेय दोनों के लिए) कि नियम 13 को उचित सम्मान दिया गया है और अनुदान को उचित ठहराया जाए।

स्पष्टीकरण

सरकारी कर्मचारी जिसे निम्नलिखित निकायों की परीक्षाओं के संबंध में काम करने के लिए बुलाया जाता है, उसे पारिश्रमिक स्वीकार करने की अनुमति दी जाएगी-

  • राजस्थान के विश्वविद्यालय
  • आरपीएससी और डीपीएससी
  • HCM RIPA
  • अन्य राज्य सरकार के विभाग और भारत सरकार की परीक्षाएं और अन्य संबंधित कार्य।

Rule 44

सरकार के पास चिकित्सा अधिकारियों द्वारा फीस की स्वीकृति को विनियमित करने के लिए अलग नियम बनाने की शक्ति है।

Rule 47

फीस सरकार को कब जमा की जानी चाहिए- 400/- रुपये से अधिक की किसी भी फीस का एक तिहाई या, यदि 250/- रुपये प्रति वर्ष आवर्ती है, तो सरकारी कर्मचारी को भुगतान सरकार (27.8.1965) में जमा किया जाएगा।

Rule 48

निम्नलिखित का भुगतान विशेष अनुमति के बिना स्वीकार किया जा सकता है:

  • सार्वजनिक प्रतियोगिता में निबंध/योजना के लिए प्रीमियम।
  • अपराधी की गिरफ्तारी, या सूचना या न्याय प्रशासन की विशेष सेवा के लिए इनाम।
  • किसी अधिनियम/नियम/विनियम के प्रावधानों के अनुसार कोई पुरस्कार
  • सीमा शुल्क और उत्पाद शुल्क कानूनों का कोई इनाम।
  • कोई भी शुल्क जो सरकार के किसी विशेष कानून या आदेश के तहत उसकी आधिकारिक क्षमता में प्रदर्शन करने के लिए आवश्यक है।
  • आरसीएस (पुरस्कार और योग्यता प्रमाण पत्र प्रदान करना) नियम 1973 के तहत सरकारी कर्मचारियों को सरकार द्वारा दिए जाने वाले नकद पुरस्कार।

सरकारी कर्मचारी आकाशवाणी पर प्रसारण कर सकते हैं यदि ऐसे प्रसारण विशुद्ध रूप से साहित्यिक, कलात्मक या परिवार कल्याण, कृषि, पशुपालन, सहकारिता, पंचायती राज और ग्रामीण विकास के वैज्ञानिक चरित्र के हैं, तो उन्हें मानदेय प्राप्त करने के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है।

Rule 49

अनुसंधान कार्य में नियोजित सरकारी कर्मचारी द्वारा किए गए आविष्कार के लिए पेटेंट-अधिकार प्राप्त करने पर प्रतिबंध, सरकार की अनुमति के साथ और सरकार जैसी शर्तों के अनुसार लागू हो सकती है।

अध्याय 6. नियुक्तियों का संयोजन

Rule 50. नियुक्तियों का संयोजन

  • सरकार एक सरकारी कर्मचारी को अस्थायी उपाय के रूप में या किसी एक समय में दो स्वतंत्र पदों पर कार्य करने के लिए नियुक्त कर सकती है, उसका वेतन निम्नानुसार विनियमित किया जाएगा:
    • यदि किसी पद पर उसकी नियुक्ति अकेले हो तो वह उच्चतम वेतन जिसके लिए वह हकदार है, उस पद के कार्यकाल के आधार पर दिया जाएगा।
    • दूसरे पद के लिए उसे उचित वेतन मिलेगा, लेकिन अनुमानित वेतन का 3% से अधिक नहीं।
    • देय प्रतिपूरक एवं अन्य भत्ते
  • नियुक्ति संयोजन की अवधि किसी भी स्थिति में 6 माह से अधिक नहीं रहेगी। 6 माह के बाद पद स्थगित रखा जायेगा।

पद सृजन की तिथि-

नव निर्मित पद के प्रभावी होने की तिथि दिनांक 01.10.2017 से प्रभावी होगी। सृजित पद को पहले पूर्णकालिक आधार पर भरा जाता है। उस तिथि से पहले कोई स्थानापन्न वेतन भत्ता नहीं।

अध्याय 7. भारत से बाहर प्रतिनियुक्ति

Rule 51

भारत से बाहर प्रतिनियुक्ति पर सरकारी कर्मचारियों के वेतन और भत्ते केंद्रीय नियमों के अनुसार विनियमित किए जाएंगे:

  • जब सरकारी कर्मचारी अपने पद या किसी विशेष कर्तव्य के सिलसिले में भारत से बाहर प्रतिनियुक्ति पर होता है, तो उसे वही वेतन दिया जाता है जो उसे भारत में ड्यूटी पर रहने पर मिलता है।
  • प्रतिनियुक्ति पर एक सरकारी कर्मचारी को विदेश में प्रतिपूरक भत्ता भी दिया जा सकता है, जैसा राष्ट्रपति उचित समझे।

अध्याय 8. बर्खास्तगी, निष्कासन और निलंबन

Rule 52

बर्खास्तगी की तारीख से वेतन और भत्ते पर रोक (प्रक्रिया जीएफ और एआर 164)।

Rule 53 (निर्वाह अनुदान)

  1. निलंबित ए.जी.एस. निम्नलिखित का हकदार होगा:
    • ऐसे वेतन के आधार पर आधे वेतन और डीए पर छुट्टी वेतन के बराबर राशि पर निर्वाह भत्ता।

प्रदान की गई सी.ए. 6 माह के बाद जीवन निर्वाह भत्ते में परिवर्तन करने में सक्षम होना चाहिए-

  1. निर्वाह भत्ता के 50% से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता है, यदि उनकी राय में, निलंबन की अवधि सरकारी कर्मचारी के लिए जिम्मेदार नहीं होने वाले कारणों से बढ़ा दी गई है।
  2. निर्वाह भत्ते को 50% तक कम किया जा सकता है, यदि उनकी राय में, निलंबन की अवधि उन कारणों से बढ़ा दी गई है जो सरकारी कर्मचारी के लिए जिम्मेदार नहीं हैं।
  3. डी.ए. उपरोक्त (i) एवं (ii) के अनुसार वृद्धि/कमी भी की जाएगी।

कोई अन्य स्वीकार्य मुआवजा भत्ता जो उसे निलंबन के समय उसकी शर्तों के अनुसार प्राप्त हो रहा था।

स्पष्टीकरण:

  • सरकारी सेवक को एक प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना चाहिए जो किसी अन्य रोजगार, व्यवसाय, पेशे या व्यवसाय में संलग्न नहीं है।
  • उसका निर्वाह भत्ता रोका नहीं जा सकता, भले ही सरकारी कर्मचारी पूर्व अनुमति प्राप्त किए बिना मुख्यालय छोड़ दे। नियंत्रण प्राधिकारी उसके लिए सीसीए के तहत एक और जांच शुरू कर सकता है।

Rule 54 (Re-installment)

  1. नियंत्रण प्राधिकारी यह आदेश देने के लिए कि पुनर्स्थापना पर विचार करेगा और एक विशिष्ट आदेश देगा –
    1. ऐसी अवधि के लिए सरकारी कर्मचारी को भुगतान किए जाने वाले वेतन और भत्ते के संबंध में।
    2. क्या उक्त अवधि को ड्यूटी पर व्यतीत की गई अवधि के रूप में माना जाएगा या नहीं।
  2. यदि सरकारी कर्मचारी को पूर्णतः दोषमुक्त कर दिया जाता है, यदि निलंबन पूरी तरह से अनुचित पाया जाता है, तो सरकारी कर्मचारी को पूर्ण वेतन और डी.ए. दिया जाएगा। ड्यूटी से अनुपस्थिति की अवधि को सभी प्रयोजनों के लिए ड्यूटी पर व्यतीत की गई अवधि के रूप में माना जाएगा।
  3. अन्य मामलों में सरकारी कर्मचारी को वेतन और भत्ते का वही अनुपात दिया जाएगा, जैसा सीए निर्धारित करता है। ऐसे मामलों में सीए निर्दिष्ट करेगा कि ड्यूटी से अनुपस्थिति की अवधि को ड्यूटी पर माना जाएगा या नहीं (छुट्टी को परिवर्तित किया जा सकता है)
  4. यदि दण्ड आदेश में पेंशन अवधि के प्रयोजन के लिए गणना के बारे में कुछ भी इंगित नहीं किया गया है, तो इसे पेंशन के प्रयोजन के लिए गिना जाएगा।

नोट-

  • समीक्षा या अपीलीय प्राधिकारी निलंबन के तहत बिताई गई अवधि को छुट्टियों में से एक में बदलने और छुट्टी वेतन के भुगतान के लिए सक्षम है।
  • यदि कोई सरकारी कर्मचारी जिसे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है या हटा दिया गया है, उसे अपील पर बहाल कर दिया गया है और बर्खास्तगी/हटाने और बहाली के दिनों के बीच के अंतराल को ड्यूटी पर बिताए गए दिनों के रूप में मानने का आदेश दिया गया है और छुट्टी और वेतन वृद्धि के लिए गणना करने की अनुमति दी गई है, जैसे आदेश प्रभावी होगा।

Rule 55

निलंबन के तहत किसी सरकारी कर्मचारी को छुट्टी नहीं दी जा सकती है। ऐसी स्थिति में नियंत्रण प्राधिकारी द्वारा अपरिहार्य परिस्थितियों में उचित अवधि के लिए मुख्यालय छोड़ने की अनुमति दी जा सकती है।

  • नियम 55 (A)- ऐसे सरकारी कर्मचारी को छुट्टी नहीं दी जाएगी जिसे सक्षम दंड प्राधिकारी ने सरकारी सेवा से बर्खास्त करने, हटाने या अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने का निर्णय लिया हो।

अध्याय 9. अनिवार्य सेवानिवृत्ति

Rule 56

किसी सरकारी कर्मचारी की अनिवार्य सेवानिवृत्ति की तिथि उस माह के अंतिम दिन की दोपहर होगी जिसमें वह 60 वर्ष की आयु प्राप्त कर लेगा।

नोट- एक सरकारी कर्मचारी जिसकी जन्मतिथि महीने की पहली तारीख है, वह 60 साल की उम्र में पिछले महीने के आखिरी दिन की दोपहर में सेवा से सेवानिवृत्त हो जाएगा।

यदि माह के अंतिम दिन अवकाश हो तो भी सरकारी कर्मचारी को उस दिन दोपहर में कार्यालय का कार्यभार छोड़ देना चाहिए।

RSR के सभी रूल्स को पढ़ने के लिए इस pdf को पढ़े और आप इसको डाउनलोड भी कर सकते हो:

https://hcmripa.rajasthan.gov.in/UploadDoc/Download_Doc/f7ff1f41-e3d7-4b65-9475-f72c6e653526-RSR%20Book.pdf

निष्कर्ष:

तो ये था RSR के निमय, हम उम्मीद करते है की इस आर्टिकल को पूरा पढ़ने के बाद आपको rsr के सभी रूल्स को पढ़ने का मौका मिल गया होगा और उसके बारे में आपको पूरी जानकारी भी मिल गयी होगी।

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