क्या वैज्ञानिक (साइंस) भूत को मानते है या नहीं?

क्या भूत असली होते हैं? यह आप पर निर्भर करता है। वर्तमान की विज्ञान यह साबित नहीं कर सकती कि आत्माएं दीवारों के माध्यम से चल रही हैं या फर्शबोर्ड के नीचे चिल्ला रही हैं। हालांकि हमारे सामने कई बार डरावने दृश्य आते हैं, जिससे भूतों की वास्तविकता महसूस होती है।

जब तक हम जीवित हैं, मनुष्य भूतों को खोजता रहेगा। अब हम कुछ हद तक इसकी व्याख्या कर सकते हैं कि ऐसा क्यों है। यह हमारे सात मानसिक और शारीरिक factor के कारण होता है।

आपने बहुत से लोगों से यह बात अवश्य सुनी होगी कि भूत हमारी धरती पर भटकते रहते हैं। मूवीज में अक्सर भूतों की डरावनी पिक्चर देखने को मिलती है, जिससे हमारा संशय और भी बढ़ जाता है।

भारत में भूत-प्रेतों की कहानियाँ सबसे ज्यादा प्रचलित है। यहाँ पर तो कुछ लोग भूत भगाने के लिए भी प्रसिद्ध है। हालांकि असल में इस बात का कोई सबूत नहीं है, कि असल में भूत होते हैं।

इसे सिर्फ वैज्ञानिक तरीके से ही समझाया जा सकता है, कि भूत असल में होते है या नहीं। भूतों के होने की कहानी हमारे बचपन से ही शुरू हो जाती है। जब हमारे दादा-दादी या नाना-नानी हमें भूतों की कहानियाँ सुनानी शुरू कर देते हैं।

वक्त के साथ यह कहानियाँ और फिल्में हमारे अवचेतन मन में इकट्ठा होने लगती है। वक्त के साथ हमें धीरे-धीरे वो चीजें रियल में महसूस होने लगती है। क्योंकि जब भी हम किसी वस्तु को बिना देखे डर जाते हैं, तो उसे भूत मान लेते हैं।

वैसे भूतों की वास्तविकता हमारे विश्वास से ही पैदा होती है। अगर आपको विश्वास है कि भूत है, तो भूत वास्तव में है। वहीं अगर आप इन पर विश्वास नहीं करते हैं, तो भूत की कोई वास्तविकता नहीं है।

भूत क्या है?

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भूत वो डरावने चेहरे या वस्तुएँ है, जिनको देखकर लोग अक्सर डर जाते हैं। भूत असल में मरे हुए लोग होते हैं, जिनकी आत्माएँ इस दुनिया में भटकती रहती है।

भूत को मृत व्यक्ति की आत्मा माना जाता है जो जीवित लोगों को दिखाई देते हैं। भूतों के चित्रण सूक्ष्म, पारभासी आकृतियों से लेकर अधिक यथार्थवादी और सजीव रूपों तक भिन्न होते हैं। प्राचीन काल से कई संस्कृतियों के लोकगीतों में भूत की कहानियाँ सुनने को मिलती हैं।

ये अक्सर एकान्त होते हैं और उन विशेष स्थानों या लोगों को परेशान करते हैं जिनसे वे जीवन में जुड़े थे। भूतों की अवधारणा प्राचीन धारणा पर आधारित है कि किसी व्यक्ति की आत्मा मरने के बाद उसके शरीर से अलग हो जाती है।

फिर वह आत्मा उसी इंसान की आकृति में इधर से उधर भटकती रहती है। पुराने समय में अंतिम संस्कार की रस्में इसलिए की जाती थी, ताकि मृतक की आत्मा जीवित लोगों को परेशान न कर सके।

इस फ़ैक्ट के बावजूद कि बहुत से लोग भूतों में विश्वास करते हैं, विज्ञान इनके अस्तित्व को नकारता है। इस बात का कोई सबूत नहीं है कि भूत मौजूद हैं, या यह कि मृतकों की आत्माएं किसी विशेष स्थान पर रहती हैं।

पैरानॉर्मल उन घटनाओं को कहते हैं, जिन्हें सामान्य वैज्ञानिक समझ से नहीं समझाया जा सकता। उदाहरणों में देखे तो टेलीपैथी और अध्यात्मवाद इस प्रकार के उदाहरण हैं।

साथ ही भूत निकालना और क्रिप्टोजूलॉजी (पौराणिक प्राणियों के अस्तित्व को साबित करने का प्रयास) जैसे छद्म विज्ञान भी इसमें शामिल हैं। विज्ञान के पास अभी इनके बारे में कोई एक्सप्लनेशन नहीं है।

भूत होने के वैज्ञानिक कारण

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आश्चर्यजनक संख्या में लोग भूतों में विश्वास करते हैं। एक सर्वेक्षण में पाया गया कि 72 प्रतिशत से भी ज्यादा भारतीयों का मानना है कि कुछ जगहों पर पर आत्माओं का साया होता है। विज्ञान के आने के बाद भी 2015 से लगभग 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

लेकिन रात में आवाज आने वाली चीजों का एक वैज्ञानिक आधार हो सकता है, बजाय इसके कि वहाँ एक भूत हो। अगर आपको भी किसी जगह पर भूतों का अहसास होता है, तो हम आपको आज कुछ वैज्ञानिक कारण बता रहे हैं।

जिससे आप निष्कर्ष निकाल लेंगे कि असल में भूत होते हैं, या नहीं।

1. विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र (Electromagnetic Fields)

दशकों तक माइकल पर्सिंगर नाम के एक कनाडाई न्यूरोसाइंटिस्ट ने लोगों की भूतों की धारणाओं पर विद्युत चुम्बकीय क्षेत्रों के प्रभावों का अध्ययन किया है।

उनके अनुसार यह pulsed magnetic fields इंसान के माइंड के टेम्पोरल लोब में unusual activity patterns पैदा करता है। इसकी वजह से हमें हमारे आस-पास कुछ होने का अहसास होने लगता है।

पर्सिंगर ने अपनी प्रयोगशाला में तथाकथित “गॉड हेलमेट” पहने हुए लोगों का अध्ययन किया, जिसमें पाया गया कि 15 से 30 मिनट के लिए किसी के सिर पर कमजोर चुंबकीय क्षेत्र के कुछ पैटर्न यह धारणा बना सकते हैं कि कमरे में एक invisible presence है।

हालांकि बाद में इस रिसर्च को ज्यादा जगह नहीं मिली। क्योंकि इसके बाद किए गए रिसर्च में लोग इस सुझाव का जवाब दे रहे थे कि वे विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र के बजाय एक ghost की उपस्थिती महसूस कर रहे हैं।

हालाँकि पर्सिंगर ने माना कि यह प्रयोग उनके अपनी रिसर्च की तुलना में बहुत अलग प्रोटोकॉल का पालन करता है। अन्य वैज्ञानिकों ने यह भी पाया है कि भूतिया जगहों में अक्सर असामान्य चुंबकीय क्षेत्र होते हैं।

लेकिन अभी तक इस बात का कोई ठोस सबूत नहीं हैं। हालांकि वास्तव में magnetic field हमारे दिमाग में विचलन पैदा करता है। इस कारण से हमारा दिमाग उस तरह के निष्कर्ष निकालना शुरू कर देता है।

2. इन्फ्रासाउंड

इन्फ्रासाउंड इतने लॉ लेवल का साउंड है, कि इंसान इसे सुन नहीं सकता है। जबकि अन्य जानवर जैसे हाथी आराम से सुन सकते हैं। जब इस तरह का साउंड पैदा होता है, तो यह हमारे लिए शारीरिक परेशानी पैदा करता है।

वैज्ञानिकों ने घरों के पास पवन टर्बाइनों और यातायात के शोर के प्रभावों का अध्ययन करते हुए पाया है कि कम आवृत्ति के शोर से भटकाव, घबराहट की भावना, हृदय गति और ब्लड प्रेशर में परिवर्तन और अन्य प्रभाव पैदा होते हैं, जिससे हमें किसी के होने का अहसास होता हैं।

उदाहरण के लिए भूत-प्रेत के प्राकृतिक कारणों पर 1998 के एक पत्र में, इंजीनियर विक टैंडी ने एक चिकित्सा उपकरण निर्माता के लिए काम करने का वर्णन किया था। जिनकी प्रयोगशालाओं में एक कथित रूप से haunted room भी था।

जब भी टैंडी इस विशेष लैब में काम करता था, तो वह उदास और असहज महसूस करता था, अक्सर अजीब चीजें सुनता और देखता था – जिसमें एक भूत भी शामिल था जो निश्चित रूप से भूत की तरह दिखता था।

आखिरकार उन्होंने पाया कि उस कमरे में एक पंखे से आने वाली 19 हर्ट्ज की खड़ी लहर थी, जो न सूनने वाली कंपन को बाहर भेज रहा था जिससे भयावह प्रभाव (disorienting effects) पैदा हो रहा था।

आगे के अध्ययन भी इन्फ्रासाउंड और विचित्र संवेदनाओं के बीच संबंध दिखाते हैं, जैसे रीढ़ को ठंड लगना या बेचैनी महसूस होना। इस तरह से हमें इन्फ्रासाउंड के कारण भूत के होने का अहसास होता है।

3. Mold

शेन रोजर्स, क्लार्कसन विश्वविद्यालय में एक इंजीनियरिंग प्रोफेसर ने महीनों तक कथित तौर पर कुछ haunted locations पर घूमते रहे, जहाँ पर कुछ असाधारण गतिविधि होती थी, जिसे mold growth कहा जाता है।

प्रारंभिक रिसर्च ने संकेत दिया कि कुछ mold ऐसे लक्षण पैदा करते हैं जो बहुत भूतिया लगते हैं। जैसे तर्कहीन भय और मनोभ्रंश। इन तरह की आकृतियों को देखकर अक्सर भूत होने का अहसास होता है।

Mold पुरानी हवेलियों, घरों आदि में हमें आसानी को देखने मिल जाते हैं। असल में मोल्ड एक प्रकार का कवक होता है। यह अपने आप को विभिन्न रंगों में visible करता है।

4. Carbon Monoxide Poisoning

1921 में W.H. विल्मर नाम के एक डॉक्टर ने अमेरिकन जर्नल ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी में एक haunted house के बारे में एक अजीब कहानी प्रकाशित की थी। इस haunted house में रहने वाले परिवार, जिसे चिकित्सा साहित्य में H Family कहा जाता है।

इस परिवार ने अजीब घटनाओं का अनुभव करना शुरू कर दिया जब वे एक पुराने घर में रहने के लिए आए थे। जैसे फर्नीचर के चारों ओर घूमना और रात में अजीब आवाजें सुनना, अदृश्य भूतों की उपस्थिति महसूस करना।

उन्होंने बताया कि उन्हें भूतों ने बिस्तर पर पकड़ रखा है, जिससे वे बहुत कमजोर महसूस कर रहे हैं, और बहुत कुछ। लेकिन बाद में जब घर की तलाशी ली गई तो सारा दोष एक भट्टी का निकला।

वो भट्टी उनके घर को कार्बन मोनोऑक्साइड से भर रही थी, जिससे सुनने और दिखने में मतिभ्रम हो रहा था। बाद भट्ठी को ठीक कर दिया गया और अब H Family बिना भूत-प्रेत के अपना जीवनयापन करने लगी।

5. किसी और की बात पर विश्वास करना

हम ज़्यादातर उस बात पर विश्वास कर लेते हैं, जो कोई हमें कहता है। खासकर भूत-प्रेत से जुड़ी बात हो। क्योंकि असल में हम इनके बारे में कुछ नहीं जानते हैं।

हमें बचपन से ही भूत-प्रेत के बारे में सुनने या देखने को मिल जाता है। इस कारण जब हम लगातार इन बातों के बारे में सुनते हैं, तो हमारा अवचेतन मन इन पर विश्वास करने लगता है।

अवचेतन मन पर छोड़ी गई छाप एक दिन हमारे सामने आ जाती है। इसी कारण जब हम रात को उठते हैं, तो हमें ऐसा लगता है, कि कमरे के दरवाजे का बाहर कोई है। क्योंकि अक्सर फिल्मों और कहानियों में भी ऐसा ही होता है।

इसके अलावा जब हमारा कोई दोस्त और रिश्तेदार कह देता है, कि उस जगह पर कोई न कोई भूतीया चीज है। तो पहले हम उनकी बात पर विश्वास नहीं करते हैं। लेकिन बार-बार कहने पर हमारा दिमाग उसको सही मान लेता है।

जिस कारण जब कभी भी हम उस जगह से निकलते हैं, तो हमारा दिमाग वहाँ पर उस प्रकार के दृश्य दिखाना शुरू कर देता है। फिर अगर कोई भी वस्तु हमें भूत ही नजर आती है।

लेकिन असल में ऐसा कुछ नहीं होता है। यह सिर्फ हमारे दिमाग में भूत होने के विचार होते हैं, जिनके बीज हम लगातार अपने दिमाग में बो रहे हैं। अगर भूत होते तो शायद हम इंसान आज ऐसी जिंदगी नहीं जी रहे होते।

6. हम जानबूझकर विश्वास करना चाहते हैं

हम सभी मृत्यु के बाद जीवन में विश्वास करना चाहते हैं। हमारी मृत्यु दर का विचार वह है जिसके साथ हम आम तौर पर सहज नहीं हैं। वक्त के साथ हम यह सोचने लग जाते हैं, कि वास्तव में ऐसा होता है।

अभी भी कुछ लोग ऐसे हैं, जिनको सिर्फ भूतों पर ही विश्वास है। उनको आप चाहे किसी प्रकार का कोई भी साइंटिफिक कारण बता दो। उनकी नजर में भूत है, तो सिर्फ है।

इस प्रकार के विश्वास को तोड़ना बहुत मुश्किल होता है। समय के साथ हमारा यही विश्वास चीजों को वास्तव में हमारे सामने प्रदर्शित करने लगता है। इसी कारण हमारा दिमाग भी घबराहट और डर की स्थिति में हमारे सामने भूत जैसी काल्पनिक चीजों को पैदा करने लगता है।

क्या वैज्ञानिक (साइंस) भूत को मानते हैं?

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वैज्ञानिक हमेशा से ही भूतों के प्रति एक मत नहीं है। कुछ वैज्ञानिकों के अनुसार भूत होते हैं, जबकि कुछ के अनुसार ऐसा दुनिया में कुछ नहीं है। लेकिन जो वैज्ञानिक भूतों पर विश्वास करते हैं, असल में उनकी संख्या बहुत कम है।

असल में विज्ञान भूतों के अस्तित्व की न तो पुष्टि कर सकता है और न ही इनकार कर सकता है। विज्ञान कई प्रमुख मनोवैज्ञानिक और भौतिक कारकों के बारे में बता सकता है जो आपको तब प्रभावित करते हैं जब आपके पास भूत जैसी किसी चीज़ का अनुभव होता है।

अंधेरा तहखाना, यार्ड का डरावना हिस्सा या हमारे घर के पीछे का जंगल। हम सभी के पास ऐसे स्थान या परिस्थितियाँ होती हैं जो हमें थोड़ा भयभीत या सतर्क महसूस कराती हैं।

ऐसी जगह जाने पर हम अपने आप डरने लगते हैं। जब शरीर में भय की ऐसी स्थिति पैदा होती है, तो हमारा दिमाग उस चीज की कल्पना करने लगता है, जिससे हमें डर लगता है।

इसका उदाहरण आप इस तरह से भी समझ सकते हैं। आपको जंगली जानवरों से भरे किसी जंगल में छोड़ दिया जाए। रात के समय आपके पीछे झाड़ियों में किसी प्रकार की कोई हलचल होती है।

तब आप तुरंत ही महसूस करने लगते हैं, कि पीछे कोई जानवर है। उस समय आप यह नहीं सोचेंगे कि वहाँ पर भूत है। क्योंकि जब आप यहाँ पर आए थे तो आपके दिमाग को यह पता था कि यहाँ पर जानवर है।

इसी प्रकार जब आपको ऐसे जंगल में छोड़ दिया जाए, जहाँ लोग भूत होने का दावा करते हैं। तो फिर झाड़ियों में होने वाली हलचल को आप भूत ही कहेंगे। तो इस प्रकार स्पष्ट है, कि हमारे पास असल में इसका कोई जवाब नहीं है।

  • कभी-कभी हम किसी गलत जगह पर गलत समय में मौजूद होते हैं। जैसे हमने कमरे में प्रवेश किया, तो हवा गेट के माध्यम से अंदर तेजी से जाती है। फिर वो दीवारों पर टकराकर डरावनी एक्टिविटी पैदा करती है। उसी हवा के झोंके से रूम के अंदर रखी कोई वस्तु जमीन पर गिर जाती है। जिससे हमें किसी असामान्य चीज के होने का अहसास होता है।
  • कई बार जब हम अकेले होते हैं। अकेलापन हमारे दिमाग को बहुत सारी चिंता और भय से भरता है। जिसके साथ हर साउंड, चरमराहट और लाइट बढ़ने लगता है और जिससे हमें कुछ भूतिया होने का संकेत मिलता है।
  • कुछ घरों में ऊँची-ऊँची आवाज़ें और कंपन होते हैं जो लगभग undetectable नहीं होते हैं। लेकिन ये हमारे psyches को नुकसान पहुँचा सकते हैं। जिससे हमारे अंदर चिड़चिड़ापन आने लगता है। यह अजीब “वाइब” जिसे आप अपने घर में महसूस करते हैं, वह आपके वातावरण में साउंड या कंपन होता है।

भूत: क्या तथ्य या कल्पना है?

भूतों की धारणा पर लंबे समय से बहस चल रही है। चाहे वह भानगढ़ का किला हो, ऐनी बोलिन की खोई हुई आत्मा हो या आपके पड़ोसी के किसी व्यक्ति का मरने के बाद दिखना हो। भूत उन लोगों के शरीर के अवशेष हैं जो मर चुके हैं।

भूत एक साधारण अजीब उपस्थिति से लेकर एक जीवित प्राणी की आभा तक होते हैं। लगभग आधे से ज्यादा भारतीय भूतों या मृत्यु के बाद के जीवन में विश्वास करते हैं। इन विश्वास करने वाले लोगों ने ऐसे कई अनुभवों को शेयर किया है, जिनमें वे भूत होने का दावा करते हैं।

इसके अलावा कई धार्मिक भी विश्वासी होते हैं। कई धर्म मृत्यु के बाद के जीवन पर विश्वास करते हैं। हिंदू धर्म और बौद्ध धर्म पुनर्जन्म में विश्वास करते हैं। जबकि ईसाई धर्म, इस्लाम और यहूदी धर्म मानते हैं कि आत्मा शाश्वत है और मृत्यु के बाद भी अस्तित्व में रहेगी।

लोग इस विचार में ज्यादा विश्वास करते हैं क्योंकि कोई नहीं जानता कि मृत्यु के बाद क्या होता है। इसलिए कुछ लोग ऐसा भी मानते हैं, कि मरने के बाद हमारी आत्मा यहीं भटकती रहती है। जिसे हम भूत कहते हैं।

हम अपने आसपास क्या हो रहा है? इसके लिए स्पष्टीकरण चाहते हैं। यह ठीक उसी तरह है, जैसे मानव मस्तिष्क को तार-तार किया जाता है। हमें यह जानने की जरूरत है कि ये भूतिया चीजें क्यों घटित होती हैं।

जब कुछ रहस्यमयी घटनाओं की बात आती है, तो हमारे पास इनका अंदाजे के अलावा कोई फिक्स आन्सर नहीं होता है। भूतों के बारे में जानकारी पूरे इंटरनेट और टेलीविजन पर पाई जाती है।

भूतों की अवधारणा हजारों सालों से चली आ रही है। भूतों की उत्पत्ति पर मुझे मिली एकमात्र वेबसाइटों में से एक विकिपीडिया है, जो कहती है कि भूतों की कहानियों की उत्पत्ति प्रारंभिक मेसोपोटामिया और प्राचीन ग्रीस में हुई थी।

इसके अलावा भूतों को होमर के ओडिसी और इलियड में लिखा गया था। बाइबिल में अपने अनुयायियों को विश्वास दिलाने से पहले यीशु को पहले भूत माना जाता था कि वह मृतकों में से जी उठा है।

इसके अलावा भूत की कहानियां मध्य युग के दौरान और पुनर्जागरण के दौरान पूरे इतिहास में आज तक फैली हुई हैं। अतीत की तुलना में आधुनिक समय में अधिक लोग भूतों पर विश्वास करते हैं। प्रत्येक वर्ष इन पर विश्वास करने वालों की संख्या बढ़ती जा रही हैं।

इसी तरह समय के साथ भूतों के खिलाफ साक्ष्य की मात्रा भी बढ़ती जा रही है। भूतों को असाधारण इसलिए माना जाता है क्योंकि उनकी कल्पना को विज्ञान प्रमाणित नहीं कर पाता।

ऐसा कोई प्रतिकृति प्रयोग ज्ञात नहीं है, जो किसी भूत की उपस्थिति को सही ठहरा सके। मृत्यु के बाद आत्माओं के रूप में वापस आने वाले लोग प्रकृति के सभी वैज्ञानिक नियमों की अवहेलना करते हैं।

इन सबके अलावा भूतों का विश्वास सिर्फ कहानियों के माध्यम से जीवित रहता है जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में पारित होता है। भूतों के अस्तित्व के पक्ष में अधिकतर विश्वासी होते हैं, क्योंकि वे अपने अनुभवों को सामान्य परिस्थितियों से जोड़ नहीं सकते।

विश्वास पूरी तरह से व्यक्तिगत अनुभव पर धार्मिक विश्वासों (मृत्यु के बाद जीवन, पुनर्जन्म, आदि) की मदद से बनाया गया है ताकि यह समझाया जा सके कि बाद के जीवन में क्या होता है।

एक वैज्ञानिक के अनुसार “भूतों के सबूत हमारे चारों ओर हैं, लेकिन केवल एक निश्चित संवेदनशीलता वाले जीवित प्राणी ही उनकी उपस्थिति महसूस कर सकते हैं।”

इसके अलावा वह वैज्ञानिक बताता है कि भौतिक प्रमाण बनाने के लिए हमारे पास तकनीक अभी तक पर्याप्त उन्नत नहीं है। कुछ क्वांटम भौतिकविदों के अनुसार “हम अभी भी क्वांटम स्तर पर मानव मन और बाहरी पदार्थ की बातचीत को पूरी तरह से नहीं समझते हैं।”

इसके अलावा भूत मरे हुए इंसान नहीं हो सकते हैं, लेकिन समय के अन्य पॉइंट से केवल वे इंसान हैं।

दूसरी ओर जो लोग भूतों के आधार के खिलाफ हैं, वे विज्ञान पर ज्यादा विश्वास करते हैं। अगर कोई मरकर भी लौट आए तो यह प्रकृति के नियम के खिलाफ होगा। ये विरोधाभासी विचार भौतिकी के नियमों के खिलाफ जाते हैं।

इसके अलावा अगर ये आत्माएं वास्तव में खो गई थीं और उनका अधूरा कारोबार था, तो माध्यम उन्हें कई तरह से मदद करने में सक्षम होंगे (उनकी हत्याओं को हल करें, हत्यारों की पहचान करें)।

जो ghost hunters भूत होने का दावा करते हैं, वे अपने दावों को प्रदर्शित करने के लिए छद्म विज्ञान का उपयोग करते हैं। जिसमें विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र मीटर, कैमरे, थर्मामीटर और अन्य उपकरण शामिल होते है।

ये ऊर्जा में किसी भी परिवर्तन का पता लगाने के लिए उपयोग किए जाते हैं। फिर ऊर्जा में परिवर्तन को स्वतः ही एक अलौकिक प्राणी की उपस्थिति मान लिया जाता है।

इस निष्कर्ष पर पहुँचना कि वातावरण में कोई परिवर्तन अपसामान्य कारणों से होता है। फिर लोग परिणामों की गलत व्याख्या करते हैं। फिर वे केवल ऐसे सबूतों की तलाश करते हैं जो भूतों में उनके विश्वास को मजबूत करते हैं।

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निष्कर्ष:

तो ये था क्या साइंस भूत को मानता है या नहीं, हम उम्मीद करते है की इस आर्टिकल को पूरा पढ़ने के बाद आपको पता चल गया होगा की क्या वैज्ञानिक भूत प्रेत को मानते है या नहीं.

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इसके अलावा आपका इस विषय में क्या मानना है और क्या आप भूत प्रेत को मानते है की नहीं उसके बारे में अपनी बात हमारे साथ कमेंट में जरुर शेयर करें.